बेवकूफ़ों की भरमार

Bewakuuf!

बेवकूफों की यहाँ कमी नहीं,भई, हम भी तो हैं खडे हुए।
सडकों की यहाँ कमी नहीं ,दो पत्थर जो हैं पडे हुए ।
बिजली रानी का हम क्या ही कहें, बस दो बार दिन में आती हैं,
शुक्रवार और शनिवार को,कभी चार बार भी आ जाती हैं।

बेवकूफों की यहाँ कमी नहीं—————————-

खाना-पीना तो कहीं-कहीं, दो रुपए में ही सिमट जाता है,
दो का समोसा, बाकी चाय उधारी चढ जाता है।
पानी की भी कमी नहीं, अब्बा दो-चार घडे भर लाते हैं,
खाने-पीने धोने में दो,दो ALS-चैलेंज में हम बहाते हैं।

बेवकूफों की यहाँ कमी नहीं—————————-

समय की बिलकुल कमी नहीं,यहाँ फेसबुक चलता रहता है,
दो मिनट जरा,एक कमेंट तो कर लूँ-likeऐवँई हो जाता है।
टैलेंट की बिलकुल कमी नहीं, सब बेवकूफ गुगलाते हैं,
लिखकर दो शब्द जैसे हरिवंश राय बन जाते हैं।

बेवकूफों की यहाँ कमी नहीं—————————-

पैसों की है कमी मगर,ससुरे खर्च जो हो जाते हैं,
दारू, सुट्टाऔर दवा सब महँगे ही अब आते हैं।
अच्छे नेताओं की है कमी यहाँ,सीधी बातें कब कर पाते हैं,
बेवकूफों की मंडली में आजकल ,सरदार हमीं कहलाते हैं।
इसलिए इसबार के चुनाव में भाइयो व बहनो,
वोट हमें ही देना यारों,
एक अवसर सेवा की बेवकूफी का,
हमें भी करने देना यारो।
क्योंकि -
बेवकूफों की यहाँ कमी नहीं, जबतक हम-तुम-से हैं पडे हुए,
आबाद रहे अंधों की नगरी,हैंअब अक्ल के अंधे खडे हुए।

–MSC

2 Responses to बेवकूफ़ों की भरमार

  1. garima says:

    Waahh Waaah!! :D bhot khood likha hai

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